Wireless Power Supply: अब घर-घर में होगी वायरलेस बिजली, खोजी गई नई तकनीक

Wireless Electricity: अभी तक आपने वायरलेस इंटरनेट के बारे में सुना होगा, जिसका इस्तेमाल जमकर किया जाता है. लेकिन अब वायरलेस बिजली भी मिलने वाली है. जी हां आपने सही पढ़ा. बिना तार के बिजली सप्लाई करने का तरीका खोज लिया गया है. इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है. अगर ये तरीका कारगर साबित हुआ तो लोगों को वायरलेस बिजली भी मिलने लग जाएगी. इस तकनीक का सफल परीक्षण करते हुए अमेरिका ने एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक 1.6 किलोवाट बिजली की सप्लाई की है. बिना तार के बिजली सप्लाई करने का आइडिया लगभग 100 साल पुराना है. दुनियाभर के कई देशों में बिना तार के बिजली पहुंचाने को लेकर कई प्रोजक्ट भी चलाए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी देश को पूरी तरह से सफलता नहीं मिल सकी है. लेकिन अब अमेरिका ने बिना तार के बिजली सप्लाई करने का कारगर तरीखा ढूंढ निकाला है. यूएस नेवल रिसर्च लेबोरेटरी ने किया परीक्षण यूएस नेवल रिसर्च लेबोरेटरी (एनआरएल) ने मैरीलैंड में यूएस आर्मी रिसर्च फील्ड में माइक्रोवेव बीम का उपयोग करके 1 किलोमीटर से अधिक 1.6 किलोवाट बिजली को पहुंचाया. इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिक ने बताया कि इसका सिद्धांत काफी सरल है. बिजली को माइक्रोवेव में परिवर्तित किया जाता है.  जिसे बाद में रेक्टेना एलिमेंट से बने रिसीवर पर एक बीम में केंद्रित किया जाता है. ये बहुत ही सरल घटक है.  जिनमें एक आरएफ डायोड के साथ एक एक्स-बैंड डाईपोल एंटीना होता है. जब माइक्रोवेव रेक्टेना से टकराते हैं  तो एलिमेंट करंट उत्पन्न करते हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय जांच रहा प्रोजक्ट की व्यवहारिकता अडवांस कॉन्सेप्ट ग्रुप के प्रमुख क्रिस्टोफर रोडेनबेक के नेतृत्व में एनआरएल टीम को रक्षा विभाग ने एक सेफ एंड कन्टिन्यूअस पावर बीमिंग- माइक्रोवेव (SCOPE-M) प्रोजक्ट को विकसित करने का काम सौंपा था. उनका मिशन इस तरह की तकनीक और उसकी व्यवहारिकता का पता लगाना था. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक संदेह के बावजूद, माइक्रोवेव बीमिंग आश्चर्यजनक रूप से कुशल साबित हुई है. ऐसे में इस तकनीक पर आगे भी काम किया जाएगा. निकोल टेस्ला ने 150 साल पहले की थी परिकल्पना 1890 के दशक में सबसे पहले टेस्ला ने ही बिना तार के पावर की सप्लाई की परिकल्पना की थी. इसके लिए उन्होंने 'टेस्ला कॉइल' नाम की एक ट्रांसफार्मर सर्किट पर काम भी किया था. जो बिजली को पैदा करता था लेकिन वो ये साबित नहीं कर सके कि वह लंबी दूरी पर बिजली के एक बीम को नियंत्रित कर सकता है. तभी से दुनियाभर के वैज्ञानिक आज तक बिना तार के बिजली सप्लाई करने का कारगर तरीका खोज रहे हैं. ये भी पढ़ें: Power Crisis: क्यों हो रहा बिजली संकट? क्या देश में कम हो रहा कोयला या है और कोई कारण- कोयला सचिव से जानें ये भी पढ़ें: Delhi News: दिल्ली में बिजली की डिमांड ने तोड़े सारे पुराने रिकॉर्ड, गर्मी की वजह से हुआ इजाफा

Wireless Power Supply: अब घर-घर में होगी वायरलेस बिजली, खोजी गई नई तकनीक

Wireless Electricity: अभी तक आपने वायरलेस इंटरनेट के बारे में सुना होगा, जिसका इस्तेमाल जमकर किया जाता है. लेकिन अब वायरलेस बिजली भी मिलने वाली है. जी हां आपने सही पढ़ा. बिना तार के बिजली सप्लाई करने का तरीका खोज लिया गया है. इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है. अगर ये तरीका कारगर साबित हुआ तो लोगों को वायरलेस बिजली भी मिलने लग जाएगी.

इस तकनीक का सफल परीक्षण करते हुए अमेरिका ने एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक 1.6 किलोवाट बिजली की सप्लाई की है. बिना तार के बिजली सप्लाई करने का आइडिया लगभग 100 साल पुराना है. दुनियाभर के कई देशों में बिना तार के बिजली पहुंचाने को लेकर कई प्रोजक्ट भी चलाए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी देश को पूरी तरह से सफलता नहीं मिल सकी है. लेकिन अब अमेरिका ने बिना तार के बिजली सप्लाई करने का कारगर तरीखा ढूंढ निकाला है.

यूएस नेवल रिसर्च लेबोरेटरी ने किया परीक्षण

यूएस नेवल रिसर्च लेबोरेटरी (एनआरएल) ने मैरीलैंड में यूएस आर्मी रिसर्च फील्ड में माइक्रोवेव बीम का उपयोग करके 1 किलोमीटर से अधिक 1.6 किलोवाट बिजली को पहुंचाया. इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिक ने बताया कि इसका सिद्धांत काफी सरल है. बिजली को माइक्रोवेव में परिवर्तित किया जाता है.  जिसे बाद में रेक्टेना एलिमेंट से बने रिसीवर पर एक बीम में केंद्रित किया जाता है. ये बहुत ही सरल घटक है.  जिनमें एक आरएफ डायोड के साथ एक एक्स-बैंड डाईपोल एंटीना होता है. जब माइक्रोवेव रेक्टेना से टकराते हैं  तो एलिमेंट करंट उत्पन्न करते हैं.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय जांच रहा प्रोजक्ट की व्यवहारिकता

अडवांस कॉन्सेप्ट ग्रुप के प्रमुख क्रिस्टोफर रोडेनबेक के नेतृत्व में एनआरएल टीम को रक्षा विभाग ने एक सेफ एंड कन्टिन्यूअस पावर बीमिंग- माइक्रोवेव (SCOPE-M) प्रोजक्ट को विकसित करने का काम सौंपा था. उनका मिशन इस तरह की तकनीक और उसकी व्यवहारिकता का पता लगाना था. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक संदेह के बावजूद, माइक्रोवेव बीमिंग आश्चर्यजनक रूप से कुशल साबित हुई है. ऐसे में इस तकनीक पर आगे भी काम किया जाएगा.

निकोल टेस्ला ने 150 साल पहले की थी परिकल्पना

1890 के दशक में सबसे पहले टेस्ला ने ही बिना तार के पावर की सप्लाई की परिकल्पना की थी. इसके लिए उन्होंने 'टेस्ला कॉइल' नाम की एक ट्रांसफार्मर सर्किट पर काम भी किया था. जो बिजली को पैदा करता था लेकिन वो ये साबित नहीं कर सके कि वह लंबी दूरी पर बिजली के एक बीम को नियंत्रित कर सकता है. तभी से दुनियाभर के वैज्ञानिक आज तक बिना तार के बिजली सप्लाई करने का कारगर तरीका खोज रहे हैं.

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