सांसद Navneet Rana की दुर्व्यवहार वाली चिट्ठी के बाद Lok Saba सचिवालय सख्त, महाराष्ट्र सरकार से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

Letter to Lok Sabha Speaker: महाराष्ट्र लाउस्पीकर को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच लोकसभा सचिवालय ने सांसद नवनीत राणा की शिकायत पर रिपोर्ट मांगी है. अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर अपने साथ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में दुर्व्यवहार की शिकायत की थी. सांसद नवनीत राणा ने 9 पॉइंट का एक मेल लोकसभा कार्यालय को किया था. ये मेल कल किया गया था और इस बारे में लोकसभा सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से इस बारे में 24 घंटे में जवाब देने के लिए कहा है.  दरअसल अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी थी. नवनीत राणा ने खत में कई हैरान करने वाले आरोप लगाए. उन्होंने लिखा मुझे 23 अप्रैल 2022 को खार पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पूरी रात मैंने पुलिस स्टेशन में बिताई. मैं पूरी रात पीने के लिए पानी मांगा, लेकिन मुझे पानी तक नहीं दिया गया.  राणा ने आगे लिखा, मुझे हैरानी तब हुई, जब पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति से हूं, लिहाजा वह उस ग्लास में मुझे पानी नहीं देंगे. मुझे सीधे तौर पर जाति के आधार पर गाली दी गई और इस वजह से मुझे पीने के लिए पानी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, मुझे पानी पीने जैसे बुनियादी मानवाधिकार से भी इस चीज को लेकर वंचित किया गया कि मैं अनुसूचित जाति से हूं.  राणा ने खत में आगे लिखा, यह मेरा सच्चा विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने स्पष्ट हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई, क्योंकि वह सार्वजनिक जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कांग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन बनाना चाहती थी. मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊंगी और उनके आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप करूंगी. यह किसी धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था. राणा ने खत में आगे कहा, वास्तव में, मैंने मुख्यमंत्री को "हनुमान चालीसा" के जाप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था. मैं दोहराती हूं कि मेरी गतिविधि मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं थी. हालांकि, इस तथ्य को देखते हुए कि मेरी गतिविधि मुंबई में कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं, मैंने हनुमान चालीसा पढ़ने की जिद छोड़ दी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर, मुंबई पुलिस ने बिना किसी नोटिस के 23.04.2022 को शाम 4.30 बजे मुंबई में मेरे घर में घुसकर मुझे और मेरे पति को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया. मैंने पुलिस पार्टी को स्पष्ट रूप से बताया कि मैं संसद सदस्य हूं और मेरे पति विधान सभा के सदस्य हैं और इसलिए जन प्रतिनिधि होने के नाते हमारे साथ इस तरह के अवैध और उच्च स्तर का व्यवहार नहीं किया जा सकता है.  उन्होंने लिखा मुझे 23.04.2022 को खार पुलिस स्टेशन ले जाया गया और 23.03.2022 को मैंने पुलिस स्टेशन में रात बिताई. हालांकि, जो सबसे अधिक चौंकाने वाला और परेशान करने वाला है, वह यह है कि जिस तरह से मेरे साथ पुलिस स्टेशन में व्यवहार किया गया. जब मैंने रात में बाथरूम का उपयोग करना चाहा, तो मौजूद पुलिस स्टाफ ने मेरी मांगों पर ध्यान नहीं दिया. मुझे फिर से सबसे गंदी भाषा में गाली दी गई और इस आधार पर कई गालियां दी गईं कि मैं अनुसूचित जाति का हूं. मुझे बताया गया कि हम नीची जाट अनुसूचित जाति के लोगों को अपने बाथरूम का इस्तेमाल नहीं करने देते. उन्होंने लिखा कि मैं निवेदन करती हूं कि खार पुलिस थाने के लॉकअप में मेरे साथ जो व्यवहार किया गया वह जानवरों से भी बदतर था. मैं कहती हूं कि 23.04.2022 की रात जब मैंने खार थाने में रात गुजारी तो मेरी सारी इज्जत लूट ली गई. मुझे अनुसूचित जाति से संबंधित होने के लिए दुर्व्यवहार और पूर्वाग्रह का शिकार होना पड़ा और यहां तक कि बुनियादी मानवीय व्यवहार से भी इनकार कर दिया, जिसका इस देश का हर नागरिक हकदार है.  ये भी पढ़ें -  'दलित होने की वजह से मुझे पुलिसवालों ने पानी तक नहीं दिया,' Om Birla को लिखी चिट्ठी में Navneet Rana ने लगाए ये आरोप Hardik Patel: क्या बीजेपी में शामिल होंगे हार्दिक पटेल? अटकलों के बीच खुद कही ये बड़ी बात

सांसद Navneet Rana की दुर्व्यवहार वाली चिट्ठी के बाद Lok Saba सचिवालय सख्त, महाराष्ट्र सरकार से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

Letter to Lok Sabha Speaker: महाराष्ट्र लाउस्पीकर को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच लोकसभा सचिवालय ने सांसद नवनीत राणा की शिकायत पर रिपोर्ट मांगी है. अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर अपने साथ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में दुर्व्यवहार की शिकायत की थी. सांसद नवनीत राणा ने 9 पॉइंट का एक मेल लोकसभा कार्यालय को किया था. ये मेल कल किया गया था और इस बारे में लोकसभा सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से इस बारे में 24 घंटे में जवाब देने के लिए कहा है. 

दरअसल अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी थी. नवनीत राणा ने खत में कई हैरान करने वाले आरोप लगाए. उन्होंने लिखा मुझे 23 अप्रैल 2022 को खार पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पूरी रात मैंने पुलिस स्टेशन में बिताई. मैं पूरी रात पीने के लिए पानी मांगा, लेकिन मुझे पानी तक नहीं दिया गया. 

राणा ने आगे लिखा, मुझे हैरानी तब हुई, जब पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति से हूं, लिहाजा वह उस ग्लास में मुझे पानी नहीं देंगे. मुझे सीधे तौर पर जाति के आधार पर गाली दी गई और इस वजह से मुझे पीने के लिए पानी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, मुझे पानी पीने जैसे बुनियादी मानवाधिकार से भी इस चीज को लेकर वंचित किया गया कि मैं अनुसूचित जाति से हूं. 

राणा ने खत में आगे लिखा, यह मेरा सच्चा विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना स्पष्ट कारणों से अपने स्पष्ट हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई, क्योंकि वह सार्वजनिक जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कांग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन बनाना चाहती थी. मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊंगी और उनके आवास के बाहर "हनुमान चालीसा" का जाप करूंगी. यह किसी धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था.

राणा ने खत में आगे कहा, वास्तव में, मैंने मुख्यमंत्री को "हनुमान चालीसा" के जाप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था. मैं दोहराती हूं कि मेरी गतिविधि मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं थी. हालांकि, इस तथ्य को देखते हुए कि मेरी गतिविधि मुंबई में कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं, मैंने हनुमान चालीसा पढ़ने की जिद छोड़ दी.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर, मुंबई पुलिस ने बिना किसी नोटिस के 23.04.2022 को शाम 4.30 बजे मुंबई में मेरे घर में घुसकर मुझे और मेरे पति को अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया. मैंने पुलिस पार्टी को स्पष्ट रूप से बताया कि मैं संसद सदस्य हूं और मेरे पति विधान सभा के सदस्य हैं और इसलिए जन प्रतिनिधि होने के नाते हमारे साथ इस तरह के अवैध और उच्च स्तर का व्यवहार नहीं किया जा सकता है. 

उन्होंने लिखा मुझे 23.04.2022 को खार पुलिस स्टेशन ले जाया गया और 23.03.2022 को मैंने पुलिस स्टेशन में रात बिताई. हालांकि, जो सबसे अधिक चौंकाने वाला और परेशान करने वाला है, वह यह है कि जिस तरह से मेरे साथ पुलिस स्टेशन में व्यवहार किया गया. जब मैंने रात में बाथरूम का उपयोग करना चाहा, तो मौजूद पुलिस स्टाफ ने मेरी मांगों पर ध्यान नहीं दिया. मुझे फिर से सबसे गंदी भाषा में गाली दी गई और इस आधार पर कई गालियां दी गईं कि मैं अनुसूचित जाति का हूं. मुझे बताया गया कि हम नीची जाट अनुसूचित जाति के लोगों को अपने बाथरूम का इस्तेमाल नहीं करने देते.

उन्होंने लिखा कि मैं निवेदन करती हूं कि खार पुलिस थाने के लॉकअप में मेरे साथ जो व्यवहार किया गया वह जानवरों से भी बदतर था. मैं कहती हूं कि 23.04.2022 की रात जब मैंने खार थाने में रात गुजारी तो मेरी सारी इज्जत लूट ली गई. मुझे अनुसूचित जाति से संबंधित होने के लिए दुर्व्यवहार और पूर्वाग्रह का शिकार होना पड़ा और यहां तक कि बुनियादी मानवीय व्यवहार से भी इनकार कर दिया, जिसका इस देश का हर नागरिक हकदार है. 

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