संयुक्त राष्ट्र का दावा, रूस यूक्रेन युद्ध के कारण हर पांचवा इंसान हो सकता है गरीबी और भूखमरी का शिकार

यूक्रेन रूस युद्ध का आज 54वां दिन है. इन 54 दिनों में रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर बमबारी की है. जंग में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लाखों लोग अपना देश छोड़ पड़ोसी देशों में शरणार्थी बन गए हैं. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने अनेक विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था के लिए तबाही का खतरा पैदा कर दिया है.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार, यूक्रेन संकट दुनिया के हर पांचवें इंसान को प्रभावित कर सकती है. इस युद्ध के कारण हर पांचवा इंसान भूखमरी का शिकार हो सकता है. या 1.7 बिलियन से अधिक लोगों को गरीबी और भूखमरी में डुबो सकता है.  गुटेरेस ने रविवार को प्रकाशित चेक सेज़नाम ज़प्रावी प्रकाशन (Czech Seznam Zpravy) के साथ के एक इंटरव्यू में कहा कि हम सभी यूक्रेन में चल रहे युद्ध को देख रहे हैं. लेकिन अपनी सीमाओं से परे, युद्ध ने विकासशील दुनिया पर भी एक मूक हमला शुरू कर दिया है. यह संकट 1.7 बिलियन लोगों तक या यूं कहें कि मानवता के पांचवें से ज्यादा हिस्से को गरीबी और भूख में डूबा सकती है. उन्होंने कहा कि युद्ध का असर दुनिया में ऐसा हो सकता है जिसे दशकों में नहीं देखा गया." गुटेरेस ने कहा की यूक्रेन और रूस में गेहूं और जौ के विश्व उत्पादन का 30 प्रतिशत प्रोडक्शन होता है, सभी मकई का पांचवां हिस्सा और सभी सूरजमुखी तेल के आधे से अधिक उत्पादन इन्हीं दो देशों में होता है. हाल ही में  एंटोनियो गुटेरेस ने एक रिपोर्ट जारी की थी और कहा कि युद्ध गरीब देशों में भोजन, ईंधन तथा आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है. ये देश पहले से ही महामारी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सुधार के लिए धन की कमी से निपटने में संघर्ष कर रहा है. 107 देशों के संकट की जद में आने का जोखिम व्यापार और विकास को बढ़ावा देने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने कहा कि ये लोग 107 देशों में रहते हैं, जिनके किसी न किसी संकट की जद में आने का काफी जोखिम है. रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में लोग स्वस्थ आहार नहीं ले पा रहे हैं, भोजन और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात आवश्यक है, लेकिन कर्ज का बोझ और सीमित संसाधन अनेक वैश्विक वित्तीय स्थितियों से निपटने की सरकार की क्षमता को सीमित करते हैं. ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का पीएम मोदी को जवाबी पत्र, क्षेत्र में शांति-सुरक्षा और कश्मीर पर कही ये बात Russia Ukraine War: युद्ध का 54वां दिन, यूक्रेन ने मारियुपोल में आत्मसमर्पण करने से किया इनकार, रूस ने कहा- तेज करेंगे हमला  

संयुक्त राष्ट्र का दावा, रूस यूक्रेन युद्ध के कारण हर पांचवा इंसान हो सकता है गरीबी और भूखमरी का शिकार

यूक्रेन रूस युद्ध का आज 54वां दिन है. इन 54 दिनों में रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर बमबारी की है. जंग में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लाखों लोग अपना देश छोड़ पड़ोसी देशों में शरणार्थी बन गए हैं. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने अनेक विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था के लिए तबाही का खतरा पैदा कर दिया है. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार, यूक्रेन संकट दुनिया के हर पांचवें इंसान को प्रभावित कर सकती है. इस युद्ध के कारण हर पांचवा इंसान भूखमरी का शिकार हो सकता है. या 1.7 बिलियन से अधिक लोगों को गरीबी और भूखमरी में डुबो सकता है. 

गुटेरेस ने रविवार को प्रकाशित चेक सेज़नाम ज़प्रावी प्रकाशन (Czech Seznam Zpravy) के साथ के एक इंटरव्यू में कहा कि हम सभी यूक्रेन में चल रहे युद्ध को देख रहे हैं. लेकिन अपनी सीमाओं से परे, युद्ध ने विकासशील दुनिया पर भी एक मूक हमला शुरू कर दिया है. यह संकट 1.7 बिलियन लोगों तक या यूं कहें कि मानवता के पांचवें से ज्यादा हिस्से को गरीबी और भूख में डूबा सकती है. उन्होंने कहा कि युद्ध का असर दुनिया में ऐसा हो सकता है जिसे दशकों में नहीं देखा गया."

गुटेरेस ने कहा की यूक्रेन और रूस में गेहूं और जौ के विश्व उत्पादन का 30 प्रतिशत प्रोडक्शन होता है, सभी मकई का पांचवां हिस्सा और सभी सूरजमुखी तेल के आधे से अधिक उत्पादन इन्हीं दो देशों में होता है. हाल ही में  एंटोनियो गुटेरेस ने एक रिपोर्ट जारी की थी और कहा कि युद्ध गरीब देशों में भोजन, ईंधन तथा आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है. ये देश पहले से ही महामारी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सुधार के लिए धन की कमी से निपटने में संघर्ष कर रहा है.

107 देशों के संकट की जद में आने का जोखिम

व्यापार और विकास को बढ़ावा देने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने कहा कि ये लोग 107 देशों में रहते हैं, जिनके किसी न किसी संकट की जद में आने का काफी जोखिम है.

रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में लोग स्वस्थ आहार नहीं ले पा रहे हैं, भोजन और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात आवश्यक है, लेकिन कर्ज का बोझ और सीमित संसाधन अनेक वैश्विक वित्तीय स्थितियों से निपटने की सरकार की क्षमता को सीमित करते हैं.

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