भारत आएंगे ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन, अगले 15 दिन कूटनीति का केंद्र रहेगा PM मोदी का गृह राज्य गुजरात

UK PM Boris Johnson's India Visit: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इस महीने के आखिर में भारत के दौरे पर रहेंगे. इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष अपने संबंधों को और भी मजबूत करेंगे. जॉनसन अप्रैल के आखिरी हफ्ते में दिल्ली के दौरे पर आ सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन के बीच आखिरी मुलाकात पिछले साल नवंबर में ग्लासगो समिट के दौरान हुई थी. पिछले साल प्रधानमंत्री जॉनसन की भारत यात्रा दो बार रद्द हुई थी. पहली बार जनवरी में जब उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था. हालांकि, उस वक्त देश में कोरोना संकट के चलते यह यात्रा संभव नहीं हो पाई थी. इसके बाद अप्रैल में भी कोरोना संकट के कारण उनका दौरा रद्द हुआ था. जी-7 के अध्यक्ष होने के नाते ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री मोदी को न्योता दिया था, लेकिन महामारी के चलते प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा नहीं हो सका. व्यापार को 2030 तक दोगुना करने पर सहमति मई 2021 में दोनों नेताओं के बीच वर्चुअल मीटिंग हुई और 2030 के रोडमैप पर चर्चा हुई. यह रोडमैप स्वास्थ्य, जलवायु, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और रक्षा में यूके-भारत संबंधों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है. बैठक के दौरान दोनों देश संबंधों की स्थिति को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' ( Comprehensive Strategic Partnership) तक बढ़ाने पर भी सहमत हुए. व्यापार समझौते की चर्चा के बीच इस वर्चुअल बैठक के प्रमुख परिणामों में दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक दोगुना करने पर सहमति बनी. वर्तमान में ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापार लगभग 23 बिलियन पाउंड प्रति वर्ष है. भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव में शामिल होगा ब्रिटेन पिछले महीने ही ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज़ ट्रस यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच "Wider Diplomatic Push" के सदस्य के तौर पर भारत दौरे पर आया थीं. पिछले साल अक्टूबर में विदेश सचिव के रूप में यह उनकी दूसरी यात्रा थी और 13 महीनों में विदेश मंत्री के रूप में उनकी तीसरी यात्रा थी. ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन, भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव में शामिल होगा और समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर एक प्रमुख भागीदार बन जाएगा. यह दक्षिण पूर्व एशिया में प्रमुख भागीदारों के साथ काम का समन्वय करेगा. अगले 15 दिन में भारत और यूके के बीच कई उच्च स्तरीय कार्यक्रम होंगे. यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच यह सभी सामान्य चिंताओं, साझा मूल्यों और व्यापार पर केंद्रित होंगे. वहीं, गुजरात अगले सप्ताह कूटनीति का केंद्र रहेगा, क्योंकि डब्ल्यूएचओ प्रमुख और मॉरीशस के पीएम के साथ पीएम मोदी 19 तारीख को ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जीसीटीएम) का उद्घाटन करेंगे. पीएम मोदी के गृह राज्य में बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भी दौरा होगा. ये भी पढ़ें-  रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई टेंशन, चीन का ताइवान की राजधानी पर 'हमला', जानें ताइवान ने खुद को अटैक से कैसे बचाया कश्मीरी पंडितों को मिली धमकी के विरोध में शिवसेना ने किया प्रदर्शन, सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग

भारत आएंगे ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन, अगले 15 दिन कूटनीति का केंद्र रहेगा PM मोदी का गृह राज्य गुजरात

UK PM Boris Johnson's India Visit: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन इस महीने के आखिर में भारत के दौरे पर रहेंगे. इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष अपने संबंधों को और भी मजबूत करेंगे. जॉनसन अप्रैल के आखिरी हफ्ते में दिल्ली के दौरे पर आ सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन के बीच आखिरी मुलाकात पिछले साल नवंबर में ग्लासगो समिट के दौरान हुई थी.

पिछले साल प्रधानमंत्री जॉनसन की भारत यात्रा दो बार रद्द हुई थी. पहली बार जनवरी में जब उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था. हालांकि, उस वक्त देश में कोरोना संकट के चलते यह यात्रा संभव नहीं हो पाई थी. इसके बाद अप्रैल में भी कोरोना संकट के कारण उनका दौरा रद्द हुआ था. जी-7 के अध्यक्ष होने के नाते ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री मोदी को न्योता दिया था, लेकिन महामारी के चलते प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा नहीं हो सका.

व्यापार को 2030 तक दोगुना करने पर सहमति

मई 2021 में दोनों नेताओं के बीच वर्चुअल मीटिंग हुई और 2030 के रोडमैप पर चर्चा हुई. यह रोडमैप स्वास्थ्य, जलवायु, व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और रक्षा में यूके-भारत संबंधों के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है. बैठक के दौरान दोनों देश संबंधों की स्थिति को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' ( Comprehensive Strategic Partnership) तक बढ़ाने पर भी सहमत हुए. व्यापार समझौते की चर्चा के बीच इस वर्चुअल बैठक के प्रमुख परिणामों में दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक दोगुना करने पर सहमति बनी. वर्तमान में ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापार लगभग 23 बिलियन पाउंड प्रति वर्ष है.

भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव में शामिल होगा ब्रिटेन

पिछले महीने ही ब्रिटेन की विदेश सचिव लिज़ ट्रस यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच "Wider Diplomatic Push" के सदस्य के तौर पर भारत दौरे पर आया थीं. पिछले साल अक्टूबर में विदेश सचिव के रूप में यह उनकी दूसरी यात्रा थी और 13 महीनों में विदेश मंत्री के रूप में उनकी तीसरी यात्रा थी. ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन, भारत के इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव में शामिल होगा और समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर एक प्रमुख भागीदार बन जाएगा. यह दक्षिण पूर्व एशिया में प्रमुख भागीदारों के साथ काम का समन्वय करेगा.

अगले 15 दिन में भारत और यूके के बीच कई उच्च स्तरीय कार्यक्रम होंगे. यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच यह सभी सामान्य चिंताओं, साझा मूल्यों और व्यापार पर केंद्रित होंगे. वहीं, गुजरात अगले सप्ताह कूटनीति का केंद्र रहेगा, क्योंकि डब्ल्यूएचओ प्रमुख और मॉरीशस के पीएम के साथ पीएम मोदी 19 तारीख को ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जीसीटीएम) का उद्घाटन करेंगे. पीएम मोदी के गृह राज्य में बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भी दौरा होगा.

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