चीन कोविड बैनः श्रीलंकाई छात्रों को वापसी की अनुमति, भारतीयों पर साधी चुप्पी

ड्रैगन ने एक बार फिर से भारत के साथ दोयम दर्जे का रवैया अपनाते हुए बीजिंग में लगे सख्त कोविड बैन के बीच श्रीलंकाई छात्रों को बीजिंग में जाकर पढ़ाई करने की अनुमति दे दी है लेकिन भारतीय छात्रों की वापसी पर चुप्पी साध रखी है. आपको बता दें कि चीन के बीजिंग में कोरोना संक्रमण के बाद से ही 2 साल से ज्यादा समय से सख्त कोविड वीजा प्रतिबंध लगा दिया गया था. अब चीन ने श्रीलंका के छात्रों को पढ़ाई के लिए वापसी की अनुमति दे दी है जबकि भारतीय छात्रों की वापसी पर चीन की चुप्पी नहीं टूटी है. बता दें कि चीन में 23000 से भी ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.   इससे पहले साल 2019 में चीन के वुहान से कोरोना संक्रमण की महामारी निकलकर पूरे विश्व में फैल गई है. इस महामारी को रोकने के लिए पूरी दुनिया ने यात्रा सहित कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हैं. यात्रा प्रतिबंधों के चलते चीन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारत और अन्य देशों के हजारों छात्र पिछले साल मार्च के बाद से चीन नहीं लौट पाए हैं. गुरुवार को श्रीलंकाई दूतावास ने इस बात का ऐलान किया कि चीन के विदेश मंत्रालय ने उन्हें इस बात की सूचना दी है, श्रीलंकाई छात्रों को दो समूहों में चीन लौटने को कहा है. भारत ने डाला छात्रों की वापसी का दबाव  श्रीलंकाई दूतावास ने आगे बताया कि चीन श्रीलंका के बचे हुए छात्रों को अपने यहां वापस बुला रहा है हालांकि चीन ने छात्रों की संख्या के विषय में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है. हालांकि बीजिंग की कठोर जीरो टॉलरेंस वीजा पॉलिसी के चलते ये एक विवादस्पद मुद्दा बन गया है. एक तरफ चीन श्रीलंकाई छात्रों की वापसी पर बात करता है वहीं दूसरी तरफ दुनिया के हजारों छात्रों को बीजिंग अपनी कठोरवीजा नीति के चलते वहां आने की अनुमति नहीं दे रहा है. वहीं भारत चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे 23000 से भी ज्यादा छात्रों की वापसी की अनुमति के लिए चीन पर दबाव बना रहा है.  छात्रों की वापसी पर एस जयशंकर ने की थी चीनी समकक्ष से बात आपको बता दें कि पिछले महीने भारतीय दौरे पर नई दिल्ली आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे को उठाया था. बीते कुछ महीनों के दौरान चीन ने अपने कुछ मैत्री देशों जैसे पाकिस्तान, थाईलैंड और सोलोमन द्वीप समूह के छात्रों को एक बार फिर से पढ़ाई के लिए उनकी वापसी की इजाजत देता रहा है लेकिन भारतीय छात्रों और चीन में काम करने वाले सैकड़ों भारतीयों की वापसी की इजाजत देने को लेकर वो चुप्पी साध लेता है.  चीन ने किया था भारतीय छात्रों की वापसी का वादा इसके पहले फरवरी में चीन ने भारतीय दूतावास से इस बात का वादा किया था कि वो जल्द से जल्द भारतीय छात्रों की वापसी करवाएंगे. इसके साथ ही चीन ने भारतीय दूतावास से ये वादा भी किया था कि भारतीय छात्रों के साथ अब चीन में किसी तरह का कोई भेदभाव भी नहीं किया जाएगा. चीन ने कहा भारतीय छात्रों की पढ़ाई शुरू करना किसी तरह का सियासी मुद्दा नहीं है.  Coronavirus India Update: तेजी से बढ़ रहे नए मामले, क्या आने वाली है चौथी लहर? ऐसा लगा जैसे मैं सचिन और अमिताभ बच्चन हूं.. पीएम मोदी की खातिरदारी पर बोरिस जॉनसन ने की जमकर तारीफ

चीन कोविड बैनः श्रीलंकाई छात्रों को वापसी की अनुमति, भारतीयों पर साधी चुप्पी

ड्रैगन ने एक बार फिर से भारत के साथ दोयम दर्जे का रवैया अपनाते हुए बीजिंग में लगे सख्त कोविड बैन के बीच श्रीलंकाई छात्रों को बीजिंग में जाकर पढ़ाई करने की अनुमति दे दी है लेकिन भारतीय छात्रों की वापसी पर चुप्पी साध रखी है. आपको बता दें कि चीन के बीजिंग में कोरोना संक्रमण के बाद से ही 2 साल से ज्यादा समय से सख्त कोविड वीजा प्रतिबंध लगा दिया गया था. अब चीन ने श्रीलंका के छात्रों को पढ़ाई के लिए वापसी की अनुमति दे दी है जबकि भारतीय छात्रों की वापसी पर चीन की चुप्पी नहीं टूटी है. बता दें कि चीन में 23000 से भी ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.  

इससे पहले साल 2019 में चीन के वुहान से कोरोना संक्रमण की महामारी निकलकर पूरे विश्व में फैल गई है. इस महामारी को रोकने के लिए पूरी दुनिया ने यात्रा सहित कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हैं. यात्रा प्रतिबंधों के चलते चीन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारत और अन्य देशों के हजारों छात्र पिछले साल मार्च के बाद से चीन नहीं लौट पाए हैं. गुरुवार को श्रीलंकाई दूतावास ने इस बात का ऐलान किया कि चीन के विदेश मंत्रालय ने उन्हें इस बात की सूचना दी है, श्रीलंकाई छात्रों को दो समूहों में चीन लौटने को कहा है.

भारत ने डाला छात्रों की वापसी का दबाव 

श्रीलंकाई दूतावास ने आगे बताया कि चीन श्रीलंका के बचे हुए छात्रों को अपने यहां वापस बुला रहा है हालांकि चीन ने छात्रों की संख्या के विषय में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है. हालांकि बीजिंग की कठोर जीरो टॉलरेंस वीजा पॉलिसी के चलते ये एक विवादस्पद मुद्दा बन गया है. एक तरफ चीन श्रीलंकाई छात्रों की वापसी पर बात करता है वहीं दूसरी तरफ दुनिया के हजारों छात्रों को बीजिंग अपनी कठोरवीजा नीति के चलते वहां आने की अनुमति नहीं दे रहा है. वहीं भारत चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे 23000 से भी ज्यादा छात्रों की वापसी की अनुमति के लिए चीन पर दबाव बना रहा है. 

छात्रों की वापसी पर एस जयशंकर ने की थी चीनी समकक्ष से बात

आपको बता दें कि पिछले महीने भारतीय दौरे पर नई दिल्ली आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे को उठाया था. बीते कुछ महीनों के दौरान चीन ने अपने कुछ मैत्री देशों जैसे पाकिस्तान, थाईलैंड और सोलोमन द्वीप समूह के छात्रों को एक बार फिर से पढ़ाई के लिए उनकी वापसी की इजाजत देता रहा है लेकिन भारतीय छात्रों और चीन में काम करने वाले सैकड़ों भारतीयों की वापसी की इजाजत देने को लेकर वो चुप्पी साध लेता है. 

चीन ने किया था भारतीय छात्रों की वापसी का वादा

इसके पहले फरवरी में चीन ने भारतीय दूतावास से इस बात का वादा किया था कि वो जल्द से जल्द भारतीय छात्रों की वापसी करवाएंगे. इसके साथ ही चीन ने भारतीय दूतावास से ये वादा भी किया था कि भारतीय छात्रों के साथ अब चीन में किसी तरह का कोई भेदभाव भी नहीं किया जाएगा. चीन ने कहा भारतीय छात्रों की पढ़ाई शुरू करना किसी तरह का सियासी मुद्दा नहीं है. 

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